पुलिस कमिश्नर धरने पर बैठे हैं, इसका मतलब क्या है : रविशंकर

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मचे सियासी बवाल के बीच भारतीय जनता पार्टी ने ममता सरकार की घेरेबंदी की। साथ ही पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को लोकतंत्र की हत्यारी सरकार करार दिया। राज्य में संवैधानिक संकट खड़ा करने के लिए आड़े हाथों लेते हुए भाजपा ने कहा कि ममता बनर्जी उस राजदार को बचाने की कोशिश कर रही है जो तृणमूल सरकार के घपलों-घोटालों के बारे में काफी कुछ जानता है। 
भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट आरोप लगाया कि ममता बनर्जी सरकार भ्रष्ट लोगों को बचा रही है। इस कारण घोटालों की जांच में बाधा आ रही है। पार्टी का दावा है कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता से ममता बनर्जी घबरा गई हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ममता बनर्जी सरकार पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि ये पश्चिम बंगाल में आखिर हो क्या रहा है? क्यों सीबीआई को राज्य की पुलिस गिरफ्तार कर रही है? एक पुलिस कमिश्नर नेताओं के साथ धरने पर बैठे हैं, इसका मतलब क्या है?  ये किस तरह का संवैधानिक संकट पैदा करने की कोशिश की जा रही है कि सीबीआई के अधिकारियों को ही गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि धरने पर बैठकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नक्शेकदम पर चल रही हैं। उन्होंने कहा कि हमें आशा हैं कि भ्रष्टाचार की जांच के खिलाफ एजेंसी नहीं झुकेगी।
  पत्रकारों से बातचीत करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस बात की पुरजोर आशंका है कि जब राजीव कुमार एसआईटी के हेड थे तो जान-बूझ कर दस्तावेजों को नष्ट किया गया हो या इसके साथ छेड़छाड़ किया गया हो। भाजपा नेता ने कहा कि धरने का ड्रामा कर के ममता बनर्जी अपने आप को तथाकथित महागठबंधन के रूप में भी प्रोजेक्ट कर रही हैं। लेकिन  इस पर राहुल गाँधी, मायावती इत्यादि गठबंधन के स्वयंभू नेताओं को सोचना होगा कि उनका क्या होगा?उन्होंने कहा कि जब सुदीप बंदोपाध्याय और मदन मित्रा की गिरफ्तारी पर सीएम व्याकुल नहीं हुईं तो पुलिस कमिश्नर को बचाने के लिए वह इतनी परेशान क्यों हैं? ऐसे में संदेह पैदा होता है कि राजदार बहुत जानता है।
   रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 8 मई 2014 को कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी का बयान ट्वीट किया था कि पश्चिम बंगाल में चिट फंड स्कैम में 20 लाख लोगों का पैसा डूब गया है। यह निंदनीय है। और अब राहुल गाँधी कह रहे हैं कि वे ममता बनर्जी के साथ हैं। ये किस तरह के दोहरे मापदंड हैं? राहुल गांधी को यह बात स्पष्ट करनी चाहिए। 
 उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने 26 मई 2014 को शपथ ली जबकि नारदा, सारदा और रोज वैली आदि मामले की जांच इससे पहले ही शुरू हो गई थी। सारदा घोटाले की जांच 2013 में ही शुरू हो गई थी। ऐसे में विपक्षी दलों की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी , भारतीय जनता पार्टी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ अनाप-शनाप बातें कर रहे हैं। 
  केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पोंजी स्कीम्स की जांच की मांग लेकर कांग्रेस और वामपंथी समर्थक सुप्रीम कोर्ट गए थे। जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो इस पर उच्चतम न्यायालय ने 9 मई 2014 को निर्देश दिया गया कि मामले की जांच सीबीआई करेगी। उसी आधार पर काम हो रहा है। 
 
सीबीआई ने कमिश्नर को तीन बार समन भेजा 
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सीबीआई की ओर से पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को तीन बार समन भेजा गया था कि हम आपका बयान रिकॉर्ड करना चाहते हैं और जांच एजेंसी को क़ानून के तहत यह अधिकार है कि वह किसी को भी बिना बुलाये बात करे। जो व्यक्ति तीन तीन बार समन करने के बावजूद जांच में सहयोग करने नहीं आया तो क्या जांच एजेंसी उसे बता कर पूछताछ के लिए जाती?।  उन्होंने कहा कि 2016 में राज्य के विधान सभा चुनाव के वक्त भी राजीव कुमार ही कोलकाता के पुलिस कमिश्नर थे जिस पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने उन्हें हटाया था लेकिन चुनाव बाद फिर इस राजदार को ममता बनर्जी ने वापस तैनात कर दिया। 
 
पीएम, शाह एवं योगी की सभाओं पर डारा रोड़ा 
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की सभा के लिए मैदान छोटा कर दिया, सभा में हंगामा करने की कोशिश की गई। इसके अलावा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हेलिकॉप्टर तक को लैंड नहीं करने दिया गया। हम सबने देखा है कि पंचायत चुनावों में लोगों को वोट तक नहीं डालने दिया गया। यह पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल में इस प्रकार का संवैधानिक संकट पैदा हुआ हो। एक बार सेना अपने जवानों के लिए ट्रैफिक टेस्टिंग कर रही थी तो ममता बनर्जी ने कहा था कि मुझे भारतीय सेना में भरोसा नहीं है। 

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