दो सालों में और बढ़ेगी यूपी में विकास की रफ्तार

आशीष पाण्‍डेय: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्य नाथ ‘योगी’ ने यूपी की राजनीति में एक अनोखा रिकार्ड बनाया है। यूपी में बीजेपी से अब तक 5 मुख्यमंत्री बने हैं। जिनमें सबसे ज्यादा समय तक अपने पद पर रहने का रिकॉर्ड सीएम योगी के नाम पर दर्ज हो गया है। योगी सरकार 19 मार्च को तीन साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही है। बीजेपी में अभी तक तीन साल तक यूपी में कोई सीएम नहीं रह सका है, लेकिन अब ये रिकॉर्ड ‘योगी’ ने तोड़ा है। अपने तीन साल के कार्यकाल में योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश दशा ही नहीं बदली, बल्कि उसे नई दिशा भी दी है। इन वर्षों में योगी सरकार ने जहां एक तरफ अपराध, महिला सुरक्षा, बेरोजगारी, धार्मिक उन्माद और भ्रष्टाचार से सख्ती से निपटा है वहीं दूसरी ओर एक्सप्रेस—वे का विस्तार, जेवर एयरपोर्ट निर्माण के साथ ही युवा महोत्सव, गंगा यात्रा, डिफेंस एक्सपो जैसे अनेक आयेाजन से प्रदेश के विकास को रफ्तार देने का काम किया है।

तय हो गए एजेंडे
उत्तर प्रदेश में आदित्य नाथ ‘योगी’ की अगुवाई में जब सरकार बनी, तभी कुछ एजेंड खुद ब खुद तय हो गए थे। सीएम योगी के नेतृत्व में प्रदेश में सांस्कृतिक व धार्मिक एजेंडे को रफ्तार देने का फैसला ऐसे ही एजेंडो की नजीर है। योगी सरकार ने प्रयागराज में कुंभ मेला को उत्सव जैसा माहौल देकर, अयोध्या में दीपोत्सव, ब्रज में होली, काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर से सरकार को जोड़कर अपने एजेंडे को भरपूर धार दी। ऐसे आयोजन इस फैसले की बानगी भर थे। 2020 में योगी सरकार ने गंगा के किनारे बसे 26 जिलों में 27 जनवरी से गंगा यात्रा निकाल कर एक बार फिर उसी फैसले की धार को साबित कर दिया। हर बार की तरह इस वर्ष भी होली पर मथुरा में रंगोत्सव को और दिव्यता देने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस सबसे इतर बड़ी बात यह भी रही है कि सीएम योगी ने हार-जीत की परवाह किए बिना नोएडा नहीं जाने के मिथक को कई बार तोड़ा।

विकास से पहले सुधार
आदित्य नाथ ‘योगी’ ने यूपी की कमान संभाली थी, तो प्रदेश कई समस्याओं से जुझ रहा था। जिससे निपटने के लिए उन्होंने विकास और सुधारों का काम भी पूरी ताकत से आगे बढ़ाने का फैसला किया। जिसका नतीजा यह रहा कि नीति आयोग ने एसडीजी इंडिया सूचकांक-2019 में बताया कि, यूपी सबसे तेजी से सुधार करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। इसके अलावा यूपी इन तीन सालों में आवास व शौचालय बनाने, एमएसएमई उद्योगों की स्थापना और डीबीटी के जरिये कृषि अनुदान वितरण में पूरे देश में अव्वल नजर आया। ई-प्रोक्योरमेंट में बेस्ट परफाॅर्मिंग स्टेट और ई-टेंडर प्रणाली के बेहतरीन क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इन्वेस्टर्स समिट, डिफेंस एक्सपो व ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी ने प्रदेश में निवेश के बदलते माहौल की उम्मीद जगाई है। कई बंद चीनी मिलें चालू कराने की शुरुआत भी इस सरकार ने की है।

सिस्टम में बदलाव
योगी समझ गए थे कि यूपी को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए सिस्टम में भी बदलाव करना होगा। और यही कारण था कि  अतिरिक्त शासन में 8 घंटे काम वाली पहचान को बदलकर योगी ने 12 से 16 घंटे काम वाली पहचान बनाई। वर्तमान में न सिर्फ मुख्यमंत्री आदित्य नाथ ऑफिस व फील्ड में सक्रिय नजर आते हैं बल्कि शासन के अफसर भी अब देर रात तक मीटिंग, प्रजेंटेशन व फाइलें निपटाते दिख जाते हैं। योगी सरकार ने भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए विभागों में ई-ऑफिस और सड़क, शराब व खनन पट्टों के आवंटन में ई-टेंडर, सरकारी समानों की खरीद-फरोख्त के लिए ई-प्रोक्योरमेंट व्यवस्था लागू की। तो सरकारी अनुदान लाभार्थियों के खाते में सीधे भुगतान की पहल की गई। राशन की कालाबाजारी रोकने के लिए ई-पॉश मशीन को प्रयोग किया गया। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने आम लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सहयोग के लिए एंटी करप्शन पोर्टल शुरू किया। इनमें से कई पहल के बेहतर नतीजे नजर आने लगे हैं।

बुआ भतीते आगे निकले योगी
बीते सरकारों के 5 वर्ष पर योगी सरकार के दो वर्ष ही भारी दिखते हैं। सरकरी नौकरियों की बात करें तो योगी सरकार इसमें अव्वल दिखती है। बुआ—भतीजों के 10 साल के दौरान जहां प्रयागराज के यूपीपीएससी से 21037 भर्ती हुई तो वहीं 21 हजार भर्ती योगी सरकार ने अपने पहले दो सालों में पूरी कर ली। वहीं अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की बात करें तो बसपा सपा शासन काल में 26 हजार भर्ती हुई तो वहीं योगी सरकार में यह आंकड़ा करीब 28 हजार तक पहुंच गया है। पुलिस विभाग में भी योगी सरकार में करीब एक लाख सिपाहियों की भर्ती की हैं। वहीं मायावती—अखिलेश के समय 82 हजार 844 नौकरी मिली। बात अगर शिक्षा व्यवस्था की हो तो वर्तमान सरकार में करीब एक लाख शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया संपन्न की गई है।

बढ़ेगी यूपी के विकास की रफ्तार
तीन वर्षों के बाद भी योगी सरकार द्वारा सख्त फैसले लेने की कवायद जारी है। जिसका सीधा अर्थ है कि प्रदेश सरकार की नीतियों से अंतिम पायदान पर खड़े प्रदेशवासी को लाभ मिले। जिसके लिए ठेकों में आरक्षण की नई व्यवस्था, कृषि दुर्घटना बीमा योजना में सुधार, निवेशकों को इंसेंटिव, स्टांप व सोसाइटी एक्ट में अहम संशोधन, जिलों की रैंकिंग, 18 मंडलों के जिला मुख्यालयों का मॉडल, 218 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट, शिक्षा अधिकरण की स्थापना जैसे कारगर फैसलों को अमल लाने के लिए  प्रयास शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा दो दशक से लंबित जेवर एयरपोर्ट की स्थापना के लिए भूमि अधिग्रहण और विकासकर्ता के चयन की कार्यवाही पूरी हो गई है। संभवत: पीएम मोदी फरवरी में शिलान्यास करें। इसी वर्ष अयोध्या में श्रीराम एयरपोर्ट का भी शिलान्यास हो सकता है। इसके लिए भूमि अधिग्रहण जारी है।

 

ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से अर्थव्यवस्था को रफ्तार
योगी सरकार ने 2018 में इन्वेस्टर्स समिट किया था। इसमें 4.28 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रोजेक्ट के एमओयू हुए थे। इनमें से करीब 1.25 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट का काम शुरू हुआ। इस वर्ष अक्तूबर-नवंबर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) के आयोजन की तैयारी है। इसके जरिए 12 से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश के एमओयू कर इसे ‘निवेश-कुंभ’ का नाम दिए जाने की तैयारी है। इस समिट में भारत के अलावा करीब डेढ़ दर्जन देशों के शासकीय प्रतिनिधि और निवेशक शामिल हो सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी वर्ष अयोध्या आकर भव्य श्रीराम मंदिर की आधारशिला रखकर निर्माण कार्य की शुरुआत कर सकते हैं। चैत्र में रामनवमी या अन्य किसी शुभ अवसर पर मंदिर का शिलान्यास संभव है।

चार एक्सप्रेस-वे से बढ़ेगी रफ्तार
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का काम तेजी से चल रहा है। 2020 में चार नए एक्सप्रेस-वे का काम शुरू करने की योजना है। इनमें प्रयागराज से मेरठ तक गंगा एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे, गाजीपुर से बलिया लिंक एक्सप्रेस-वे व बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण का काम तेजी से चल रहा है। इन सभी का शिलान्यास 2020 में किए जाने की संभावना है।

फिर बनेगा विश्व रिकॉर्ड
प्रदेश सरकार ने 2019 में 22 करोड़ पौधे लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। सरकार ने 2020 में एक से सात जुलाई के बीच वन महोत्सव का आयोजन कर 25 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। विभागवार पौधरोपण की जिम्मेदारी तय कर दी गई है। इसके साथ ही यूपी अपने ही रिकॉर्ड को सुधारेगा।

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