निजीकरण की खिलाफत में हड़ताल जारी, फैसला वापस लेने के सहमति पत्र पर UPPCL चेयरमैन के दस्तख़त नहीं

  • विद्युत कर्मचारियों ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किलें
  • UPPCL चेयरमैन के फैसले का इंतजार 
  • सुविधा की बेहतरी में कर्मचारी सरकार के साथ, निजीकरण के है खिलाफ

नेशनल डेस्क : कृषि बिल को लेकर किसानों के साथ-साथ निजीकरण के फैसले पर भी बिजली विभाग सरकार का पुरज़ोर विरोध कर रहा है। दरअसल, निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने सोमवार को कार्य बहिष्कार किया। इसके चलते प्रदेश में जहाँ-जहाँ बिजली गई, वहाँ उसकी मरम्मत के लिए कोई मौजूद नहीं था।

बीते सोमवार को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के साथ विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों की बैठक हुई। जिसमें उन्होंने अपनी मांगें रखीं। जिसके बाद ऊर्जा मंत्री ने हड़ताल कर रहे कर्मचारियों के हक में फैसला लिया। उन्होंने कर्मचारियों के बीच जाकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की घोषणा की और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए।

हालांकि, विद्युत कर्मचारियों को UPPCL (उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड) के चेयरमैन को राज़ी करने में सफलता हासिल नहीं हुई है। जिसके बाद इस मामले पर ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के निर्देश के बावजूद यूपीपीसीएल चेयरमैन ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसके अलावा चेयरमैन ने सहमति पत्र पर विचार करने के लिए समय मांगा है। चेयरमैन के इस फैसले से बिजलीकर्मियों की हड़ताल फिलहाल थमने की आशंका नहीं है।

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बता दें कि सरकार के निजीकरण के फैसले के खिलाफ बिजली विभाग के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे है। उनकी पहली मांग ही है कि ‘बिजली विभाग के भीतर कोई कमियां हैं तो सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, मगर बिना कर्मचारियों और इंजिनियरों को विश्वास में लिए कहीं कोई निजीकरण नहीं होगा।’ लेकिन कर्मचारी संगठन ने बिलिंग, कलेक्शन और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार के लिए सरकार के उठाए जाने वाले हर कदम में उनके साथ को लेकर आश्वस्त किया हैं। इसके अलावा हड़ताल कर रहे कर्मचारियों की यह भी मांग है कि इस आंदोलन के चलते किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई न की जाए।

फॉल्ट के आगे उर्जा विभाग ने घुटने टेके

गौरतलब है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया तक बिजली कटौती से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ जगहों पर तो बिजली कटौती के 20-24 घंटे बीत गए हैं, मगर कोई सुध तक लेने वाला नहीं है। लेकिन ऊर्जा विभाग और जिला प्रशासन ने हड़ताल के चलते बिजली सप्लाई बहाल करने के लिए पुलिस के पहरे के साथ कई वैकल्पिक इंतजाम किए गए, लेकिन फॉल्ट के आगे सभी फेल हो गए। बिजली कटौती से परेशान उपभोक्ताओं की शिकायतों के ढेर लग गए, मगर आला अधिकारियों और सांसद-विधायकों के पास इन शिकायतों का कोई जवाब नहीं है।