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Agra: ताज नगरी की दूषित हुई हवा, सितंबर महीने में प्रदूषण ने तोड़ा रिकॉर्ड

  • आगरा बना देश का छठवां सबसे प्रदूषित शहर
  • 10 सितंबर को बीते 5 सालों के मुकाबले सबसे ज़्यादा प्रदूषण दर्ज
  • बाजार खुलना, ट्रैफिक जाम प्रदूषण के बढ़ते स्तर का कारण है
  • आगरा का AQI-Air Quality Index, 150 पर

यूपी डेस्क: बाजारों के खुलने पर लगे प्रतिबंधों को खत्म किए जाने के बाद से ही कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। वहीं, बाजारों के खुलने से लोगों का आवागमन  भी बढ़ गया है। जिससे आगरा में प्रदूषण का स्तर भी कई गुना बढ़ गया है। गुरुवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में आगरा देश का छठवां सबसे प्रदूषित शहर रहा। इस साल के सितंबर महीने में प्रदूषण बीते पांच सालों में सबसे अधिक बढ़ा है। इसी के साथ प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रदूषण के मामले में आगरा नंबर 1 पर है। आगरा का AQI-Air Quality Index गुरुवार को 150 पर रहा। वहीं, 10 सितंबर की वायु गुणवत्ता(Air Quality) की तुलना में पांच वर्षों में सबसे अधिक प्रदूषण दर्ज किया गया।

देश के सबसे प्रदूषित शहर (Polluted city)

city               – Index

चरखी दादरी   – 245

भिवाड़ी          – 241

बल्लभगढ़       – 213

फरीदाबाद     – 179

अहमदाबाद   – 171

आगरा           – 150

प्रदूषण के बढ़ते स्तर का कारण हाल के दिनों में बाजारों को खोलने, बसों का संचालन और ट्रैफिक जाम को माना जा रहा है।  इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा प्रदूषण है और सितंबर के महीने में धूल कणों की मात्रा 40 से 80 के बीच ही बनी रही है, लेकिन पहली बार इस महीने धूल कणों की संख्या 200 को पार कर गई है। विशेषज्ञ उमेश शर्मा के अनुसार, कम बारिश के कारण धूल कणों की मात्रा बढ़ गई है। सितंबर के महीने में मानसूनी बारिश के कारण धूल कणों और कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा में कमी रहती थी। लेकिन इस बार प्रदूषण स्तर में लगातार इजाफा हो रहा है।

बता दें कि वाहनों संख्या में वृद्धि , जाम के कारण बढ़ा प्रदूषण, वाहनों में ईंधन जलने के कारण गुरुवार को कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा सामान्य से 45 गुना अधिक हो गई। वहीं खतरनाक पार्टिकुलेट मैटर 2.5 माइक्रोग्राम की मात्रा सामान्य से 4 गुना अधिक 230 तक हो गई है । आप को बता दे इस साल 10 सितंबर को बीते 5 सालों के मुकाबले सबसे ज़्यादा प्रदूषण दर्ज किया गया है। इस 5 सालो में 3 साल 2016, 2018 और 2019 में प्रदूषण का स्तर मानक से नीचे है और 2017 और 2020 में दो से ढाई गुना के बीच रहा है।

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