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Anant Chaturdashi 2020: इस दिन होगा बप्पा का विसर्जन व श्री हरि का पूजन

  • 2 सिंतबर को है अनंत चतुर्दशी 
  • इस दिन है बप्पा का विसर्जन
  • भगवान विष्णु के श्री हरि के अनंत रूप की पूजा

धर्म डेस्क: हिंदू धर्म में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी व गणेश उत्सव मनाया जाता है। यह गणेश उत्सव किस तिथि से प्रारंभ होकर 11 दिन अनंत चतुर्दशी जिसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है कोमा उस दिन संपन्न होता है। बता दे इस वर्ष अनंत चतुर्दशी का यह व्रत 1 सितंबर 2020 को पढ़ रहा है। जिसके बाद ठीक अगले दिन यानी 2 सितंबर को इस साल की पितृपक्ष की शुरुआत हो जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनंत चतुर्दशी गणेश विसर्जन के साथ-साथ भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। इस दिन से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं ये हैं कि इस दिन भगवान विष्णु की अनंत रूप की आराधना करने से तथा अनंत सूत्र को बांधने से जीवन की तमाम समस्याओं से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को जीवन में कोई कष्ट नहीं होता तथा उसका जीवन सुखमय होता है।

अनंत चतुर्दशी पूजा शुभ मुहूर्त-
01 सितंबर की सुबह 05 बजकर 59 से 09 बजकर 41 मिनट तक अनंत चतुर्दशी की पूजा का मुहूर्त है।

जानिए अनंत चतुर्दशी की पूजन विधि
सनातन धर्म के अग्नि पुराण की माने तो अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के लिए सबसे पहले सूर्योदय के पूर्व उठकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें तथा इस व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मंदिर में कलश स्थापना करके भगवान विष्णु की तस्वीर या चित्र स्थापित करें एक डोरी को कुमकुम, केसर और हल्दी से रंग कर इसमें 14 गाने लगा दे एवं भगवान विष्णु को अर्पित कर दें।

अब भगवान विष्णु की पूजा में निम्न मंत्र का जाप करें
अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।

इसके बाद पूजा में बैठे पुरुष सूत्र को अपने दाएं हाथ के बाजू को महिलाएं बाएं हाथ के बाजू पर बांध लें। तथा पूजा संपन्न करने के बाद अपनी क्षमता अनुसार ब्राह्मण देवता को भोजन करवाकर उन्हें दक्षिणा देकर विदा करें तथा इसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण करें।

यहां जाने चतुर्दशी की पूजा से मिलते हैं कौन से लाभ-
शास्त्रों के अनुसार इस दिन की पूजा से कुंडली में मौजूद सभी ग्रहों की दशा वह दिशा सुधर जाती है। यानी कि उनके सुप्रभात शुभ प्रभाव में बदल जाते हैं। इसके अलावा इस दिन की पूजा से कुंडली में कालसर्प दोष से भी छुटकारा मिलता है साथ ही साथ जीवन में आने वाली तमाम समस्याओं से छुटकारा मिलता है।

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