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आर्थिक उथल-पुथल ने बढ़ाई चिंता, दुनिया भर में जा सकती हैं लाखों नौकरियां !

फिर आर्थिक मंदी की तरफ दुनिया !

2008 की तरह एक बार फिर दुनिया में वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा मंडरा रहा है. कोरोना महामारी और फिर रूस-यूक्रेन से बढ़ी महंगाई का असर केवल भारत पर ही नहीं है बल्कि दुनिया का एकमात्र महाशक्ति कहा जाने वाला अमेरिका भी इस समस्या से जूझ रहा है. वहां पर इन दिनों महंगाई का स्तर पिछले 40 सालों के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है. हालात को बिगड़ने से बचाने के लिए बाइडेन प्रशासन ने ब्याज दरें बढ़ाने का कदम उठाया है. और इस तरीके ने मंदी का खतरा पैदा कर दिया है. इसकी मुख्य वजह फेडरल रिजर्व द्वारा कीमतों को कम करने के लिए लगातार दरें बढ़ाना है. ये अनुमान है नोमुरा होल्डिंग्स इंक के अर्थशास्त्रियों का…

क्या कहते हैं नोमुरा ?

नोमुरा के अर्थशास्त्री आइची अमेमिया और रॉबर्ट डेंट ने 20 जून को एक नोट में लिखा, ” धीमी विकास गति और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए फेड के रेट हाइक को देखते हुए, हमारा मानना ​​है कि 2022 की चौथी तिमाही में शुरू होने वाली हल्की मंदी के आने की अब अधिक संभावना है.”

क्या कहा रहा है ग्लोबल ग्रोथ आउटलुक ?

नोमुरा ने चेतावनी दी है कि, वित्तीय स्थिति और टाइट हो जाएगी. कंज्यूमर सेंटीमेंट डाउन हो रहा है और खराब हो चुकी एनर्जी और फूड सप्लाई स्थिति को और खराब कर रही है जिससे ग्लोबल ग्रोथ आउटलुक बिगड़ गया है. नोमुरा ने वास्तविक जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटा दिया है. इस साल के लिए पिछला अनुमान 2.5 के मुकाबले एजेंसी ने 1.8 फीसदी का ग्रोथ अनुमान दिया है. साथ ही अगले साल के विकास अनुमान को भी एक फीसदी घटा दिया है. फाइनेंशियल सर्विस कंपनी के मुताबिक हाई इंफ्लेशन और फेड का रेट हाइक मंदी के लिए सबसे सबसे बड़े कारण हैं.  अमेरिकी फेडर रिजर्व का रूख नवंबर 2021 के बाद से ही आक्रामक रहा है. इसके बावजूद मुद्रास्फीति का दबाव कम नहीं हुआ बल्कि और बढ़ गया.

2008 में लोगों ने गंवाई थी नौकरी

नोमुरा का कहना है कि इस साल के अंत तक अमेरिका में मंदी शुरू हो सकती है, जिसका असर केवल अमेरिका पर ही नहीं बल्कि भारत-चीन समेत दुनिया के तमाम देशों पर पड़ सकता है. वर्ष 2008 में भी ऐसी ही आर्थिक मंदी आई थी, जिसके चलते दुनिया में मांग काफी कम हो गई थी. इसके चलते लोगों को बड़े पैमाने पर नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो गई थी.

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