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नहीं रहे गोल मशीन के नाम से मशहूर हॉकी खिलाड़ी पद्मश्री बलबीर सिंह सीनियर

चंडीगढ़, ब्यूरो। गोल मशीन के नाम से मशहूर हॉकी खिलाड़ी पदमश्री बलबीर सिंह सीनियर का आज सुबह निधन हो गया। डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बाद भी उनको नहीं बचाया जा सका। सांस लेने में दिक्कत होने की शिकायत के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उनको 8 मई को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था।

उम्र ज्यादा होने की वजह से उनके इलाज में दिक्कत आ रही थी। डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद सदी के इस महान खिलाड़ी ने सोमवार की सुबह 6.17 बजे दुनिया को अलविदा कह दिया। पदमश्री बलबीर सिंह सीनियर भारत के इकलौते ऐसे खिलाड़ी थे,जोकि तीन बार ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता टीम के सदस्य रहे थे।

बलबीर सिंह सीनियर मौजूदा समय में 96 साल के थे और पिछले दो सालों से उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं  था। 8 मई को उन्हें सांस में दिक्कत होने की वजह से मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इस दौरान उनके तमाम तरह के टेस्ट करवाए गए। उनका कोरोना टेस्ट भी किया गया था, जिसकी रिपोर्ट 10 मई को नेगिटिव आई थी। दो दिन बाद 12 मई को उन्हें कार्डियक अरेस्ट हो गया,जिससे वह वेंटिलेटर पर आ गए।

इसके बाद 14 मई को उन्हें फिर दो  कार्डियक अरेस्ट हुए थे। इससे वह बेसुध हो गए थे।  इसके बाद 16 मई को उनका एमआरआइ किया गया। इसमें उनके ब्रेन में एक ब्लड क्लॉट मिला था। डॉक्टरों का कहना था इसी ब्लड क्लॉट की वजह से वह बेसुध हैं। वेंटिलेटर के सहारे उनकी सांसें चल रही थी, लेकिन आज सुबह वह थम गई और इसके साथ ही वह उम्मीद भी खत्म हो गई कि चैंपियन बलबीर सिंह सीनियर  इस बार भी बीमारी को हराकर मुस्कराते हुए घर आएंगे

दुनियाभर में गोल मशीन के नाम से मशहूर थे बलबीर सिंह सीनियर

 

 

बलबीर सिंह सीनियर दुनियाभर में गोल मशीन के नाम से मशहूर थे। भारत ने हॉकी में ओलंपिक लंदन (1948), हेल्सिंकी (1952) और मेलबोर्न (1956) में गोल्ड मेडल जीता था, खास बात यह है कि इन तीनों टीमों में बलबीर सिंह सीनियर मेडल विजेता टीम के हिस्सा थे। साल 1948 के लंदन ओलंपिक में अर्जनटीना के खिलाफ उन्होंने 6 गोल दागे थे, इस मैच में भारत 9-1 से जीता था। इसी ओलंपिक के फाइनल में भारत ने इंग्लैंड को 4-0 से हराया था, इस मैच में उन्होंने पहले 15 मिनट में दो गोल कर थे।

हेल्सिंकी ओलंपिक केफाइनल मैच में उन्होंने हॉलैंड के खिलाफ फाइनल मैच 5 गोल दागे थे। जिसका रिकार्ड आज भी गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज है। साल 1954 में सिंगापुर टूर पर गई टीम इंडिया ने कुल 121 गोल किए थे, जिसमें 84 गोल अकेले बलबीर सिंह सीनियर के थे। साल 1955 में न्यूजीलैंड -आस्ट्रेलिया के खिलाफ टीम इंडिया ने 203 गोल किए, जिसमें 121 गोल बलबीर सिंह सीनियर के थे, यह वह दौर था, जब वर्ल्ड मीडिया ने उनके नाम के साथ गोल मशीन लगाना शुरू कर दिया था।

 

 

अवार्ड – साल 1957 में पद्मश्री पाने वाले पहले भारतीय। डोमिनिकन रिपब्लिक द्वारा उनकी और गुरदेव सिंह पर डाक टिकट जारी। साल 2006 में बेस्ट सिख खिलाड़ी का अवार्ड। लंदन ओलंपिक 2012 में उन्हें सदी के बेहतरीन खिलाड़ियों में चयनित किया गया। यह सम्‍मान पाने वाले वह एशिया में एकलौते खिलाड़ी थे। साल 2015 में उन्हें मेजर ध्यानचंद लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला। साल 2019 महाराजा रणजीत सिंह खेल अवार्ड।

उनकी लिखी दो किताबें – गोल्डन हैट्रिक (1977) और दूसरी द गोल्डन यार्ड स्टिक

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