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लड़कियों ने पुरुष का कार में किया गैंगरेप,

  • लड़कियों ने पुरुष का कार में किया गैंगरेप,

  • आरोपी लड़कियां 20 से 30 साल की उम्र,

  • भारतीय कानून की नजर में ऐसी घटना रेप नहीं,

(जालंधर) जालंधर में 4 लड़कियों ने 1 पुरुष का कार में ‘गैंगरेप’ किया। पुरुष ने बताया कि लड़कियों ने उसे एड्रेस पूछने के बहाने रोका। उसके चेहरे पर स्प्रे मारकर उसे गाड़ी में डाल लिया। जबरदस्ती शराब पिलाई और नशे की हालत में लड़कियों ने उसके साथ बलात्कार किया। आरोपी लड़कियां 20 से 30 साल की उम्र की हैं।

महिलाएं जो पूछ रही हैं 'पुरुष रेप क्यों करते हैं' - BBC News हिंदी

पीड़ित एक चमड़ा फैक्ट्री में मजदूर है। वह शादीशुदा और बच्चों का पिता है। उसने अपनी पत्नी के कहने पर पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई, मगर यह खबर सोशल मीडिया पर आने के बाद वायरल हो गई।

भारतीय कानून की नजर में ऐसी घटना रेप नहीं है। आगे बढ़ने से पहले ये बता दें कि हम महिलाओं के खिलाफ नहीं हैं, न ही हम महिलाओं के शोषण की अनदेखी कर रहे हैं, लेकिन LGBQ, थर्ड जेंडर और पुरुषों के यौन उत्पीड़न के मामलों की रिपोर्ट और बचाव के लिए ऐसा कानून जरूरी है। ऐसा कोर्ट भी बोल चुका है। ऐसे में रेप को जेंडर न्यूट्रल बनाए जाने की दलील को भी सिरे से खारिज नहीं कर सकते।

दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले शिवाजी शुक्ला बताते हैं कि महिला या पशु के साथ अननेचुरल सेक्शुअल रिलेशन बनाने को क्राइम माना गया है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार अगर सेक्शुअल एक्ट दो वयस्कों के बीच सहमति से हो तो यह सेक्शन 377 के तहत क्राइम नहीं माना जाएगा। वहीं, पोक्सो एक्ट में बच्चे के साथ किए गए किसी भी सेक्शुअल एक्ट को क्राइम घोषित किया गया है। इस एक्ट के तहत बच्चे का जेंडर मैटर नहीं करता है। इसी तरह से बाकी धाराओं में भी रेप को जेंडर न्यूट्रल करने की मांग की जा रही है।

निर्भया गैंगरेप के बाद भारतीय कानून में रेप के दायरे को बढ़ाया गया और इसकी परिभाषा भी व्यापक की गई। हालांकि, रेप कानून अब भी जेंडर न्यूट्रल नहीं है।

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इंडियन पीनल कोड की धारा-375 के  तहत किसी महिला से कोई पुरुष जबरनkयौनाचार या दुराचार करे तो दोनों ही रेप के दायरे में आएंगे। 2012 में निर्भया गैंगरेप के बाद इस परिभाषा में बड़ा बदलाव किया गया। अब महिला के प्राइवेट पार्ट या शरीर के किसी भी हिस्से को उसकी मर्जी के बिना छूना भी रेप के दायरे में आ सकता है।

महिला की उम्र अगर 18 साल से कम है और संबंध बनाने में उसकी सहमति है तो भी वह रेप होगा। महिला के कपड़े उतारना या बिना उतारे ही उसे संबंध बनाने के लिए पोजिशन में लाना भी रेप माना जाएगा।

केंद्र सरकार ने 2012 में आईपीसी की धारा 375 में रेप की परिभाषा बदलने की कोशिश की थी, जिसमें रेप के दायरे में पीड़ित पुरुष को भी शामिल करने की बात कही गई थी। मगर, कुछ गैर सरकारी संगठनों और नारीवादी संगठनों ने सरकार के इस प्रस्ताव पर विरोध जताया और कहा कि इससे महिला रेप पीड़िता को लेकर संवेदनहीनता और बढ़ेगी।

एडवोकेट शिवाजी शुक्ला कहते हैं कि इंडियन पीनल कोड की धारा 375 में कहा गया है कि बलात्कार केवल ‘पुरुष’ कर सकता है। महिला बलात्कार नहीं कर सकती।मगर, आईपीसी की धारा 376 में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति बलात्कार का अपराध करता है, तो उसे कम से कम 7 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा दी जाएगी और साथ ही उसे जुर्माना भी देना होगा। यहां महिला या पुरुष के बजाय व्यक्ति कहा गया है। ऐसे में पीड़ित पुरुष को इस धारा में थोड़ी सी राहत मिलती है। शिवाजी शुक्ला कहते हैं कि लेकिन जालंधर जैसे मामलों में इस धारा में केस दर्ज करने से पुलिस बचती है।

दिल्ली के ही तीसहजारी कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट अनिल सिंह श्रीनेत कहते हैं कि महिला द्वारा पुरुष का रेप करने के मामले में कानून स्पष्ट नहीं है। मगर इस पर कोर्ट भी सवाल खड़े कर चुका है। इसी साल 1 जून को केरल हाईकोर्ट के जस्टिस ए मोहम्‍मद मुश्‍ताक की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि IPC की धारा 376 जेंडर न्यूट्रल नहीं है।

तलाकशुदा मह‍िला और पुरुष में बच्‍चे की कस्‍टडी के एक मामले में सुनवाई के दौरान जज ने कहा था कि अगर मह‍िला ने झांसा देकर पुरुष से संबंध बनाया होगा तो क्‍या होगा? जज ने कहा, जाहिर है उसे सजा नहीं मिलेगी। क्‍या ऐसा कानूनी संशोधन हो सकता है क‍ि धोखा देकर यौन संबंध बनाने वाली मह‍िला को भी सजा हो?

कानून में बदलाव की मांग इसलिए भी उठ रही है क्योंकि रेप पीड़ित पुरुषों के मन पर भी इस घटना का इतना गहरा असर पड़ता है कि वो सामान्य जिंदगी नहीं जी पाते।

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भारत में पुरुषों से रेप को लेकर आंकड़े और स्टडी न के बराबर हैं। मगर, 2013 में ‘ए केस फॉर जेंडर न्यूट्रल रेप लॉज इन इंडिया’ नाम से एक स्टडी कराई गई। स्टडी के दौरान 222 पुरुषों पर एक सर्वे कराया गया, जिसमें सवाल पूछे गए थे कि क्या आप मानते हैं कि महिलाएं पुरुषों का रेप कर सकती हैं? इस पर मिले जवाब चौंकाने वाले रहे। सर्वे में शामिल 79.30 फीसदी लोगों ने माना कि महिलाएं पुरुषों का रेप कर सकती हैं। ऐसा जवाब देने वालों में बड़ी संख्या 18 से 24 साल वालों की रही। वहीं, महज 11 फीसदी ने ही यह माना कि महिलाएं पुरुष का रेप नहीं कर सकतीं।

ल वाॅयलेंस सर्वे’ (2010) के मुताबिक, 71 में से एक पुरुष का जीवन में कभी न कभी रेप हुआ है। वहीं, 5 महिलाओं में से एक को रेप जैसा क्राइम झेलना पड़ा।

सोशल एक्टिविस्ट और फिल्म मेकर इंसिया धारीवाल ने ‘द कैंडी मैन’ नाम की फिल्म बनाने के लिए 1500 पुरुषों के बीच एक सर्वे किया था। इस सर्वे में 71% पुरुषों ने सेक्शुअल अब्यूज की बात स्वीकार की, लेकिन यह बात किसी के साथ शेयर नहीं की।

इसके पीछे उनकी अलग-अलग वजह थी। किसी को यह बताने में शर्म आती है, किसी को पछतावा था तो कुछ डरे हुए थे।इस बारे में उन्होंने कहा कि सर्वे से पहले इस फिल्म की मेन लीड लड़की थी, लेकिन बाद में इसे बदलकर लड़का कर दिया गया।

एडवोकेट अनिल सिंह श्रीनेत कहते हैं कि भारत में रेप के कानून को जेंडर न्यूट्रल बनाने का मकसद केवल पुरुषों को इंसाफ दिलाना ही नहीं बल्कि इसके दायरे में थर्ड जेंडर और LGBQ कम्युनिटी को लाना भी है। मामला महिला द्वारा पुरुष का रेप करने से बड़ा है। महिला ही किसी महिला का यौन शोषण करती है या फिर इनमें से कोई भी थर्ड जेंडर का यौन उत्पीड़न करे तो इसके लिए कानून में स्पष्ट प्रावधान होने चाहिए।

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