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12 दिनों में 5.4 सेंटीमीटर धंस गया जोशीमठ,ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ बड़ा खुलासा

  • इसरो का खुलासा- जोशीमठ में 12 दिनों के भीतर 5.4 CM धंसी धरती

  • जोशीमठ ही नहीं, पूरी घाटी में हो रहा भू-धंसाव 

  • हर साल 2.60 इंच धंस रहा जोशीमठ

(उत्तराखंड डेस्क) उत्तराखंड के जोशीमठ में स्थिति बहुत भयावह हो गई है. यहां 700 से अधिक घरों में दरारें बढ़ गई हैं. शहर में भू-धंसाव के कारण लोगों में भय का माहौल है और इस कारण वे सुरक्षित ठिकानों की तरफ प्रस्थान कर रहे हैं. जोशीमठ में जिन इलाकों में ज्यादा खतरा है, वहां के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट भी किया जा रहा है. वहीं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर ने पहली बार जोशीमठ भू-धंसाव की सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं, जिसमें दिखाया गया है कि जोशीमठ शहर किस तेजी से धंसा रहा है.

इसरो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अप्रैल से नवंबर 2022 के बीच जमीन धंसने की दर बहुत कम थी। इस दौरान जोशीमठ नौ सेंटीमीटर नीचे चला गया। इसरो ने कहा है कि क्राउन ऑफ द सब्सिडेंस 2180 मीटर की ऊंचाई पर जोशीमठ-औली रोड के पास स्थित है। इससे पता चला है कि जमीन धंसने से जोशीमठ-औली सड़क भी धंसने वाली है। कार्टोसैट-2 एस सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में इसरो ने जोशीमठ में सेना के हेलीपैड और नरसिंह मंदिर समेत पूरे शहर को संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया है।

जोशीमठ सिर्फ 12 दिनों में 5.4 सेंटीमीटर धंसा, इसरो की सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ खुलासा

रिपोर्ट में जोशीमठ व आसपास के क्षेत्र में आ रहे भूगर्भीय बदलाव को देखा गया। हाल ही में आईआईआरएस ने इसकी रिपोर्ट जारी की है। इसमें दावा किया गया कि जोशीमठ हर साल 6.62 सेमी. की दर से नीचे की ओर धंस रहा है। इसकी सेटेलाइट तस्वीर भी जारी की गई है। साथ ही आईआईआरएस ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें जोशीमठ के थ्री-डी बदलावों को दिखाया गया है।

सैटेलाइट तस्वीरों में जो लाल रंग की धारियां दिख रहीं है, वो सड़कें हैं. वहीं नीले रंग का जो बैकग्राउंड है, वह जोशीमठ शहर के नीचे का ड्रेनेज सिस्टम है. इस भू-धंसाव का ऊपर हिस्सा जोशीमठ औली रोड पर मौजूद है. शहर के मध्य में हुए धंसाव को वैज्ञानिक भाषा में क्राउन कहा जाता है। यानी औली रोड भी धंसने वाली है.

आईआईआरएस ने जो वीडियो जारी किया है, उसमें यह भी दर्शाया गया कि भू-धंसाव केवल जोशीमठ शहर में ही नहीं हो रहा है। पूरी घाटी इसकी चपेट में है। आने वाले समय में इसके खतरनाक नतीजे देखने को मिल सकते हैं।

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