ओडिशा के संगठन श्री जगन्नाथ सेना का दावा
भगवान जगन्नाथ का है कोहिनूर हीरा
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप करने की मांग
नेशनल डेस्क: महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन के बाद अब कोहिनूर को लेकर दावे पेश होने लग पड़े हैं। ओडिशा के एक सामाजित संगठन ने यह दावा किया है कि दुनिया भर में मशहूर कोहिनूर हीरा भगवान जगन्नाथ का है। वहीं संगठन ने इस मामले को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप करने की मांग की है और यूनाइटेड किंगडम से इस हीरे को वापस देश में लाए।

श्री जगन्नाथ सेना ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन
पुरी स्थित संगठन श्री जगन्नाथ सेना ने राष्ट्रपति को सौंपे एक ज्ञापन में मांग की कि वह कोहिनूर हीरा 12वीं सदी के मंदिर में वापस लाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए हस्तक्षेप करें। श्री जगन्नाथ सेना के संयोजक प्रियदर्शन पटनायक ने एक ज्ञापन पत्र में कहा, ‘‘कोहिनूर हीरा श्री जगन्नाथ भगवान का है. अब यह इंग्लैंड की महारानी के पास है। कृपया हमारे प्रधानमंत्री से इसे भारत लाने के लिए कदम उठाने का अनुरोध करें … क्योंकि महाराजा रणजीत सिंह ने इसे अपनी इच्छा से भगवान जगन्नाथ को दान कर दिया था।”

14वीं सदी की शुरुआत में दक्षिण भारत में मिला था कोहिनूर
दरअसल, कोहिनूर एक बड़ा सा बेरंग हीरा है। यह 14वीं सदी की शुरुआत में दक्षिण भारत में मिला था। औपनिवेशिक काल खंड में यह ब्रिटेन के हाथ लग गया और अब ऐतिहासिक स्वामित्व विवाद का विषय है, जिस पर हिंदुस्तान समेत कम से कम चार देश दावा करते हैं।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कुछ बरस पहले सूचना के अधिकार के जवाब में बताया था कि लगभग 170 साल पहले लाहौर के महाराजा ने इंग्लैंड की महारानी के सामने झुकते हुए कोहिनूर हीरा उनके हवाले कर दिया था। यह अंग्रेजों को नहीं सौंपा गया था।
2016 में उठाया गया था कोहिनूर हीरा वापस लाने का मुद्दा
बता दें कि ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल के नेता एवं सांसद भूपिंदर सिंह ने हीरा वापस लाने का मुद्दा 2016 में राज्यसभा में उठाया था। पुरी से विधायक एवं भाजपा नेता जयंत सारंगी ने भी कहा कि वह इस मामले को ओडिशा विधानसभा में उठाएंगे।
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