- आज है इंदिरा एकादशी
- श्री हरि की पूजा रहेगी फलदायी
- इन खास मंत्रों से करना चाहिए शी हरि का ध्यान
धर्म डेस्क: 13 सितंबर अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी के रूप में मनाया जाएगा। यूं तो साल में पड़ने वाली प्रत्येक एकादशी अधिक महत्व रखती है। परंतु पितृ पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को विशेष माना जाता है। कहा जाता है इस दिन भगवान विष्णु की पूजा से पितर भी प्रसन्न होते हैं तथा अपने परिजनों को आशीर्वाद देते हैं।
यही कारण है इस दिन लोग न इंदिरा एकादशी के दिन लोग विधि वत तरीके से भगवान विष्ण की पूजा करते हैं ताकि उन्हें इनकी कृपा प्राप्त हो जिससे सारे काम बने और जीवन में से मुसीबतों दूर हो। मगर कुछ श्री हरि को प्रसन्न करने के प्रयासों में इतना घुम जाते हैं, इनकी सही पूजन विधि आदि ही भूल जाते हैं। जी हां, कुछ लोग इनकी पूजा तो करते हैं लेकिन ये भूल जाते हैं कि इनकी पूजा में इनके शुद्ध मंत्रों का जाप कितना आवश्यक होता है। तो वहीं कई लोग ये नही जान पाते कि इनकी पूजा में कौन से मंत्रों का उच्चारण किया जाए।
दरअसल हमारे धार्मिक शास्त्रों में इनके कुछ मंत्रों के बारे में बताया गया है जिनका जप खास तौर पर एकादशी तिथि के दिन करना लाभदायक माना जाता है। आइए जानते हैं कौन से वो मंत्र-
सनातन धर्म से जुड़े शास्त्रों के अनुसार प्रतिदिन भगवान श्रीहरि का स्मरण करने से जीवन के समस्त संकटों का नाश होता है तथा धन-वैभव की प्राप्ति होती है।
भगवान विष्णु जगत का पालन करने वाले देवता हैं।
उनका स्वरूप शांत और आनंदमयी है। अगर प्रतिदिन कोई मंत्र न पढ़ सकें तो कम से कम किसी खास अवसर पर या जैसे एकादशी या गुरुवार के दिन भगवान विष्णु का स्मरण कर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना फलदायी रहता है।
तो वगीं गुरुवार के दिन या एकादशी पर इनका जप करना अधिक लाभप्रद होता है, इसके जप की मदद से जीवन के अनेक कष्टों से मुक्ति पाई जा सकती हैं
आइए जानें श्रीहरि नारायण के सरलतम चमत्कारी मंत्र :-
* शीघ्र फलदायी मंत्र
– श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे।
हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
– ॐ नारायणाय विद्महे।
वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
– ॐ विष्णवे नम:
– ॐ भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि।
ॐ भूरिदा त्यसि श्रुत: पुरूत्रा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।
धन लाभ के लिए रोज बोलें :-
* लक्ष्मी विनायक मंत्र –
दन्ताभये चक्र दरो दधानं,
कराग्रगस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया
लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
* विष्णु के पंचरूप मंत्र –
– ॐ अं वासुदेवाय नम:
– ॐ आं संकर्षणाय नम:
– ॐ अं प्रद्युम्नाय नम:
– ॐ अ: अनिरुद्धाय नम:
– ॐ नारायणाय नम:
* ॐ ह्रीं कार्तविर्यार्जुनो नाम राजा बाहु सहस्त्रवान।
यस्य स्मरेण मात्रेण ह्रतं नष्टं च लभ्यते।।
ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।
– ॐ हूं विष्णवे नम:।
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