Thursday, July 7, 2022
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UP में महंगाई का डबल झटका, पेट्रोल-डीजल के साथ अब School भी करेंगे जेब ढीली

  • प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना हुआ अब अधिक मंहगा

  • योगी सरकार ने निजी स्कूलों में फीस बढ़ोत्तरी पर लगी रोक की खत्‍म 

नेशनल डेस्क School Fees Hike in UP। बीते एक महीने से देशभर के लोगों को पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों की मुसीबत को झेलना पड़ रहा है। लेकिन यूपी की जनता को अब महंगाई का डबल डोज लगने वाला है। अब तक केवल महंगे ईंधन की मार झेल रही यूपी की जनता को अब प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे। दरअसल योगी सरकार ने निजी स्कूलों में फीस में बढ़ोत्तरी पर लगी रोक को हटा लिया है।

कोरोना काल में लगाई गई थी फीस वृद्धि पर रोक

कोरोना महामारी के चलते यूपी सरकार की ओर से निजी स्कूलों में फीस की बढ़ोत्तरी पर रोक लगा दी गई थी। इस बढ़ोत्तरी को अब शासन की ओर से बहाल कर दिया गया है। इस आदेश के बाद प्रदेश के सभी शिक्षा बोर्ड से एफिलिएटेड तमाम निजी स्कूलों में 2022-23 सेशन से नियमानुसार फीस में वृद्धि हो सकेगी। हालांकि, सरकार ने स्कूल प्रशासन को फीस में संतुलित वृद्धि करने को ही कहा है। इसके लिए कुछ शर्तें को भी स्कूल प्रशासन को मानना होगा।

School Fees Hike in UP


इस आधार पर होगी वृद्धि

अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला के अनुसार निजी स्कूलों में फीस वृद्धि वर्ष 2019-20 के फीस स्ट्रक्चर के आधार पर की जा सकेगी। इसे आधार मानते हुए उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2018 की धारा 4(1) के नियम के अनुसार ही फीस में बढ़ोत्तरी होगी। इसमें शर्त यह लगाई गई है कि 2022-23 सेशन में वार्षिक वृद्धि की गणना नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर की जाए। लेकिन, उसके साथ 5 फीसदी की जो शुल्क वृद्धि होनी है, वह वर्ष 2019-20 में लिए गए वार्षिक शुल्क के 5 फीसदी से अधिक न हो।

दो सालों की वृद्धि को न जोड़ने का दिया गया निर्देश

बता दें कि निजी स्कूलों की ओर से शैक्षणिक सत्र 2020-21 और 2021-22 में फीस वृद्धि नहीं होने को भी आधार बनाया जा रहा है। कोरोना काल में सरकार की ओर से फीस वृद्धि पर रोक थी। इस स्थिति में काल्पनिक गणना के जरिए फीस का नए सिरे से निर्धारण किया जा रहा था। इससे अभिभावकों पर दबाव भी ज्यादा हो रहा था। योगी सरकार द्वारा जारी आदेश में यह साफ किया गया है कि पिछले दो वर्षों के शुल्क वृद्धि की काल्पनिक गणना किसी भी स्थिति में जोड़ी न जाए और अभिभावकों पर ज्यादा दबाव न डाला जाए। हालांकि, इसकी जांच के लिए सरकार की ओर से अब तक किसी भी प्रकार की व्यवस्था नहीं दी गई है।

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