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उमर खालिद UAPA में गिरफ्तार, दिल्ली में हिंसा भड़काने की साजिश के लगे हैं आरोप

करीब 11 घंटे पूछताछ करने के बाद रविवार देर उमर खालिद को किया गया गिरफ्तार
‘पिंजरा तोड़’ की 3 महिला सदस्यों ने लिया था उमर खालिद का नाम
दिल्ली सांप्रदायिक दंगों में हुई थी 53 लोगों की मौत

नेशनल डेस्क: दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय केपूर्व छात्र नेता उमर खालिद को दिल्ली हिंसा भड़काने की साजिश के आरोप में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया है। स्पेशल सेल ने करीब 11 घंटे पूछताछ करने के बाद रविवार देर उमर खालिद को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस उमर खालिद को आज अदालत में पेश किया गया। इस मामले में खालिद से पहले भी दो बार पूछताछ हो चुकी है। पहली बार कुछ महीने पहले पूछताछ की गई थी, जबकि दूसरी बार दो सितंबर को उससे पूछताछ की गई थी।

UAPA एक्ट के तहत गिरफ्तार उमर खालिद का जिक्र दिल्ली पुलिस ने हिंसा पर कोर्ट में पेश की अपनी एडिशनल चार्जशीट में भी किया था। दिल्ली हिंसा केस में गिरफ्तार की गई ‘पिंजरा तोड़’ की 3 महिला सदस्यों ने उमर खालिद का नाम लिया था।

पुलिस के मुताबिक, ‘पिंजरा तोड़’ की 3 छात्राओं देवांगना कलिता, नताशा नरवाल और गुलफिशा फातिमा के मुताबिक, उमर खालिद ने उन्हें दंगे के लिए उकसाया और भीड़ को लामबंद करने का काम किया था। इस अहम कबूलनामे के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कल उमर खालिद को समन भेजकर पूछताछ के लिए तलब किया था।

दिल्ली हिंसा पर घंटों पूछताछ के बाद उमर खालिद पर दिल्ली पुलिस का शक पुख्ता हो चला और उसे फौरन अरेस्ट कर लिया गया। इसकी जानकारी उमर खालिद के पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने भी ट्वीट करके दी। हालांकि दिल्ली हिंसा में इससे पहले दिल्ली पुलिस की एडिशनल चार्जशीट का जमकर मखौल उड़ा।

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोधी और समर्थकों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी को उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे जिसमें कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी जबकि करीब 200 लोग घायल हुए थे। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, स्वराज अभियान के योगेंद्र यादव, मशहूर अर्थशास्त्री जयति घोष और प्रोफेसर अपूर्वानंद का नाम लेने के बाद दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद को गिरफ्तार किया, अब दिल्ली दंगों की जांच में उनके दुर्भावनापूर्ण बर्ताव को लेकर कोई संदेह नहीं बचता। ये पुलिस द्वारा जांच की आड़ में शांतिपूर्ण कार्यकर्ताओं को फंसाने की साजिश है।

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