- पितृ पक्ष में जरूरी ये काम, शास्त्रों में है वर्णन
- पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें इन चीज़ों का दान
धर्म डेस्क: प्रत्येक वर्ष पितृ पक्ष का समापन सर्वपितृ अमावस्या के दिन होता है, जिसका सनातन धर्म में अधिक महत्व है। बता दें यूं तो हर मास में आने वाली अमावस्या तिथि को खास माना जाता है। मगर बात अगर पितृ पक्ष की करें तो इसको विशेष रूप से श्राद्ध पक्ष के लिए जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन समय में देवताओं ने भी अपने पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति के लिए पिंडदान व पितर तर्पण आदि करते थे। यही कारण है आज कलियुग में वर्ष के इन 15 दिनों में प्रत्येक व्यक्ति अपने परिजनों का तर्पण करता है।
यूं तो संपूर्ण पितृ पक्ष ही सनातन धर्म में महत्व रखता है। मगर इसका आखिरी दिन यानि सर्वपितृ अमावस्या अक्षय फलदायी प्रदान करने वाली कहलाती है। बता दें इस बार सर्वपित अमावस्या 17 सितंबर को है, जो अश्विन मास में पड़ती है। इसे मोक्षदायनि अमावस्या भी कहते हैं।
ज्योतिषी कहते हैं जिस जातक की जन्मकुंडली में पितृ दोष होता है, उसे इससे मुक्ति के लिए इस दिन तर्पण, पिंडदान एवं श्राद्ध किया जाता है। इसके अलावा इस दिन दान आदि करने का विशेष महत्व होता है। मगर बहुत कम लोग हैं जिन्हें इससे जुड़ी जानकारी है। तो चलिए आपको बताते हैं कि पितृ पक्ष की अमावस्या के दिन आपको किन चीज़ों का दान करने तथा कौन से अन्य काम करने से न केवल पितृ प्रसन्न होते हैं बल्कि मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही साथ दान करने वाले जातक को जीवन में सुख-समृद्धि की भी प्राप्ति होता है।
पितर तर्पण करें
इस दिन प्रात स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। परिजनों का पिंडदान करते समय इस बात का ध्यान रखें कि इस दौरान परिवार में से कोई बड़े-बुजुर्गों को साथ में ज़रूर रखें। इसके अलावा इस दौरान जौ के आटे, तिल और चावल से बने पिंड आवश्यक अर्पण करना चाहिए।
भोजन अर्पित करें
पितरों को तर्पण करने वाले भोजन को सबसे पहले कौवे, गाय और कुत्तों को अर्पित करें। इससे जुड़ी मान्यता ये है पितरदेव पक्षियों का रूप लेकर अपने परिजनों द्वारा दिया भोजन ग्रहण करते हैं।
पीपल पर जलाएं दीपक
प्रातः पितर तर्पण करने के दौरान पितरों के निमित्त घर बनाकर मिष्ठान व शुद्ध जल की मटकी पीपल के पेड़ के नीचे अपने पितरों के निमित्त रखकर वहां दीपक जलाकर रखें। इसके अलावा सूर्यास्त के बाद घर की छत पर चौमुखा दीपक रखें। खास रूप से ध्यान रखें कि इसका मुख दक्षिण दिशा में होना चाहिए।
ब्राह्मणों को दान करें
सर्वपितृ अमावस्या के दिन ब्राह्राणों को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा दें। सनातन धर्म के प्रमुख पुराण अग्नि व गुरुड़ पुराण में वर्णन मिलता है कि इस दिन दान आदि करके पितरों से संबंधित मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए।
चांदी का दान
सर्वपितृ अमावस्या को पितरों के नाम पर चांदी से निर्मित वस्तुओं का दान करें। जिन लोगों का इतना सामर्थ्य न हो वो केवल चंद्र ग्रह से जुड़ी वस्तुओं का दान आदि कर सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, प्रसन्न होकर वे अपनी संतानों को सुखी जीवन का आशीर्वाद देते हैं।
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