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राज्यसभा में उठी ‘सामाजिक दूरी’ शब्द इस्तेमाल न करने की मांग, जानें वजह

  • राज्यसभा में शारीरिक दूरीशब्द के इस्तेमाल की उठी मांग
  • इस शब्द से कोरोना के रोगियों के प्रति भेदभाव बढ़ रहा-शांतनु सेन
  • सभापति एम वेंकैया नायडू ने इसे कहा अच्छा सुझाव

नेशनल डेस्क: राज्यसभा में आज यानी मंगलवार को एक अलग मांग उठी है।  कोरोना  महामारी से बचाव के लिए इस्तेमाल किए जा रहे शब्द ‘सामाजिक दूरी’ को भेदभाव  बढ़ाने वाला करार देते हुए  राज्यसभा में इसके स्थान पर ‘शारीरिक दूरी’ शब्द का इस्तेमाल किए जाने की मांग उठी। तृणमूल कांग्रेस के शांतनु सेन ने विशेष उल्लेख के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि, इस शब्द से कोरोना के रोगियों के प्रति भेदभाव बढ़ रहा है और इससे सामाजिक तौर पर उनके बहिष्कार का माहौल बन रहा है।

सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि यह अच्छा सुझाव है और सामाजिक दूरी के बजाय सुरक्षित दूरी शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।सेन ने कहा कि, कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सामाजिक दूरी की बात कही जा रही है और इसका मतलब यह है कि दो व्यक्तियों के बीच छह फुट की दूरी होनी चाहिए। लेकिन इसका सामाजिक तौर पर गलत असर हो रहा है और कोरोना संक्रमित व्यक्तियों तथा उनके परिजनों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसके बजाय शारीरिक दूरी शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अनेक सदस्यों ने उनकी मांग का समर्थन किया।

श्री नायडू ने कहा कि यह अच्छा सुझाव है और वह इससे सहमत हैं लेकिन इस बारे में निर्णय सरकार को लेना है। सरकार इसके स्थान पर उचित शब्द के बारे में निर्णय ले। उन्होंने कहा कि सुरक्षित दूरी शब्द का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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