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दुनिया की सबसे ऊंची ‘अटल टनल’ बनकर हुई तैयार, जानिए क्या है इसकी खासियत ?

  • रोहतांग दर्रे में बनकर तैयार हुई 9 किलोमीटर लंबी रणनीतिक अटल सुरंग 
  • लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनाई गई सुरंग
  • पाकिस्तान-चीन बॉर्डर पर भारत की बढ़ जाएगी ताकत 

हिमाचल डेस्क: हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे के करीब बनाई गई 9 किलोमीटर लंबी रणनीतिक अटल सुरंग बनकर तैयार हो गई है। ये सुरंग कई तरह की सुविधाओं से लैस है। निर्माण शुरू होने पर इसकी डिजाइन 8.8 किलोमीटर लंबी सुरंग के रूप में बनाई गई थी लेकिन निर्माण पूरा होने पर जब जीपीएस रीडिंग ली गई तो सुरंग की लम्बाई 9 किमी. निकली। ऊंचाई के लिहाज से यह ​​दुनिया की पहली सुरंग होगी क्योंकि इसे लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है। इसके शुरू होने पर मनाली और लेह के बीच की दूरी 46 किलोमीटर कम हो जाएगी। यह सुरंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पाकिस्तान-चीन बॉर्डर पर भारत की ताकत बढ़ जाएगी।

अटल सुरंग की विशेषताएं

​इसमें ​एक आपातकालीन एस्केप सुरंग भी शामिल है जिसे मुख्य सुरंग के नीचे बनाया गया है। यह किसी भी अप्रिय घटना के मामले में एक आपातकालीन निकास प्रदान करेगा, जो मुख्य सुरंग को अनुपयोगी बना सकता है।​ ​सुरंग में हर 150 मीटर पर एक टेलीफोन, हर 60 मीटर पर अग्नि हाइड्रेंट, हर 500 मीटर पर आपातकालीन निकास, हर 2.2 किमी में गुफा, हर एक किमी​.​ पर हवा की गुणवत्ता की निगरानी प्रणाली, हर 250 मीटर पर सीसीटीवी कैमरों के साथ प्रसारण प्रणाली और घटना का पता लगाने वाली स्वचालित प्रणाली लगाई गई है।​ ​सुरंग में 80 किमी. प्रति घंटे की अधिकतम गति से ​वाहन चल सकेंगे और​ प्रतिदिन 500​0 वाहन इससे गुजर सकेंगे। ​यह सुरंग​ ​लेह और लद्दाख के आगे के क्षेत्रों के लिए सभी मौसम ​के अनुकूल होगी​।​

दरअसल बर्फ़बारी के दिनों में यह इलाका अप्रैल से नवम्बर तक देश के बाकी हिस्सों से लगभग छह महीने ​के लिए कट जाता है​​।​ बर्फ़बारी के दिनों में​ भी ​इस सुरंग से पाकिस्तान और चीन सीमा तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा क्योंकि लेह-मनाली राजमार्ग दोनों देशों की सीमा से लगा हुआ है। ऐसे में रणनीतिक क्षेत्र लद्दाख में भारत की पकड़ और मजबूत होगी।

​इसलिए इस सुरंग के शुरू होने पर ​इसी के जरिये लद्दाख सीमा तक सैन्य​ वाहनों की सुरक्षित आवाजाही हो सकेगी और सैनिकों को रसद ​पहुंचाने में दिक्कत नहीं आएगी।​ ​​​इस सुरंग से भारतीय सीमा पर स्थित अग्रिम चौकियों की चौकसी, मुस्तैदी और ताकत काफी बढ़ जाएगी।

टनल तक पहुंच मार्ग पर स्नो गैलरियां भी बनाई गईं

​रक्षा मंत्रालय के अधीन सीमा सड़क संगठन (बीआरओ)​ ने अपनी पहचान के मुताबिक इस मुश्किल कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने 21 अगस्त को सुरंग का दौरा करने के बाद बताया कि सभी तरह के निर्माण कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं। सुरंग बनाये जाने के दौरान अवशेष के रूप में अंदर बहुत अधिक धूल है।

इसी गंदगी को साफ किये जाने जैसे मामूली काम इस समय किए जा रहे हैं जो लगभग 15 दिन में पूरे हो जायेंगे। सुरंग के उत्तर में लाहौल स्पीति की ओर और दक्षिणी छोर के लिए पुलों को भी पूरा कर लिया गया है। ऑल वेदर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए मनाली की तरफ से टनल तक पहुंच मार्ग पर स्नो गैलरियां भी बनाई गई हैं। ​रोहतांग टनल के खुलने से दिल्ली से लेह-लद्दाख और हिमाचल के ​लाहौल-स्पीति घाटी तक सफ़र आसान हो जाएगा। इस सुरंग को आधुनिक तकनीक से बनाया गया है। ​

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